'जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत : ऐतिहासिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदान' विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन
भारत सरकार ने भगवान बिरसा मुंडा के जन्मदिन 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस घोषित कर भगवान बिरसा मुंडा जैसे सैकड़ों जनजातीय वीरों एवं वीरांगनाओं को यथोचित सम्मान दिया है । इसी संदर्भ में सहायक प्राध्यापक श्री विक्रांत सिंग गावस्कर के संयोजकत्व एवं श्रीमती प्रियंका साहू के सह-संयोजकत्व में शासकीय नवीन कन्या महाविद्यालय, गोबरा नवापारा में ''जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत : ऐतिहासिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदान'' विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ । यह कार्यशाला महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. मधु श्रीवास्तव के मार्गदर्शन तथा कार्यक्रम की मुख्य वक्ता पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के इतिहास अध्ययनशाला की एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ. बन्सो नुरूटी एवं अध्यक्ष श्री एल. एम. यादव की उपस्थिति में संपन्न हुआ । कार्यक्रम का संचालन अंग्रेजी के सहायक प्राध्यापक विक्रांत सिंग गावस्कर ने किया ।
मुख्य वक्ता डॉ. बन्सो नुरूटी ने अपना वक्तव्य दिया कि जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत भारत के समृद्ध इतिहास का एक अभिन्न अंग है । जनजातीय समाज में अनेक वीर और वीरांगनाएँ हुए, जिनका स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान रहा । अपनी वीरता, शौर्य, साहस, संघर्ष और बलिदान से उन्होंने भारत भूमि की रक्षा की है । प्रकृति के संरक्षण में भी उनका अभूतपूर्व योगदान रहा है । जल-जंगल-जमीन की लड़ाई रही हो, जंगल सत्याग्रह हो या राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका, उनका स्थान अविस्मरणीय है । उन्होंने जनजातीय समुदाय के ऐतिहासिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला । जनजातीय वीरांगनाओं के जीवन की वीरगाथा सुनाकर उन्होंने छात्राओं में इतिहास को जानने के प्रति जिज्ञासा भाव जगा दिया । उन्होंने आगे कहा कि सांस्कृतिक दृष्टिकोण से हम देखें तो जनजातीय समुदायों ने कला, शिल्प और लोकगीतों के माध्यम से भारतीय संस्कृति को समृद्ध किया है । उनकी संस्कृति की अपनी एक विशिष्ट पहचान है । उनकी बोलियाँ, गीत, नृत्य, संगीत प्रकृति से जुड़ी हैं और उनके सहज आनंद की अभिव्यक्ति हैं । जनजातीय समाज सामूहिकता, समानता और सहयोग के सिद्धांतों पर आधारित रहा है और उनकी सामाजिक संरचनाएँ सामूहिक विकास को बढ़ावा देती हैं । साथ ही शांतिपूर्ण जीवन जीने का आध्यात्मिक संदेश प्रदान करती हैं ।
कार्यक्रम के अध्यक्ष एल.एम. यादव ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के स्वर्णिम अध्याय में जनजाति समाज द्वारा किए गए आंदोलनों को उचित महत्त्व देकर सुशोभित करना हमारा दायित्व है । उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ से शहीद होने वाले अमर नायक शहीद वीर नारायण सिंह के परोपकारिता और जन कल्याणकारी कार्यों पर प्रकाश डालते हुए स्वाधीनता संग्राम में दिए उनके बलिदान को नमन किया ।
आभार व्यक्त करते हुए सहायक प्राध्यापक सुधीर अग्रहरि ने काल के गर्त में समा गए और इतिहास के पन्नों में उपेक्षित रह गए जनजातीय वीर योद्धाओं को प्रकाश में लाते इस तरह के आयोजन की सराहना की ।